बेनीबाद में विनाशकारी बागमती तटबंध को रोकने के लिए अनशन का दूसरा दिन अधिकारी पहुंचे l

बेनीबाद में विनाशकारी बागमती तटबंध को रोकने के लिए अनशन का दूसरा दिन अधिकारी पहुंचे 
मजदूर–किसानों को उजाड़ने डुबाने का विनासकारी बागमती तटबंध पर रोक लगाना होगा–धीरेंद्र झा
सरकार ने रिव्यू कमिटी बनाकर उसे गताल खाता में डालकर जनविरोधी कानून विरोधी काम किया है–जितेंद्र यादव
तबाही की योजना को रोकने के आपके धारवाहिक संघर्ष को सलाम–मनोज मंजिल
दीपक कुमार।, गायघाट 
बेनीबाद, गायघाट(मुज़फरपुर), 17 फरवरी, 2026। चास वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में बर्बादी के बागमती तटबंध को रोकने के लिए सामूहिक अनशन और सत्याग्रह का आज दूसरा दिन बड़ी भागीदारी वाली सभा के साथ समाप्त हुआ। आज की सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य सह मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि बागमती एक नदी नहीं नदियों का समूह है। 60 के दशक में शुरू हुई बागमती परियोजना का फलाफल नकारात्मक है, इसलिए आगे की कोई भी योजना अथवा योजना का विस्तार समग्र अध्ययन के बाद होना चाहिए। आंदोलन की आवाज के तहत रिव्यू कमिटी बनी लेकिन उसे गताल खाता में डाल दिया गया है। बिना रिव्यू कमिटी के रिपोर्ट के काम को आगे बढाना गैर कानूनी है। सरकार अगर मनमानी करेगी तो आंदोलन का और विस्तार होगा। धरना और सत्याग्रह का विस्तार होगा। 
सभा को संबोधित करते हुए बागमती आंदोलन के चर्चित नेता जितेंद्र यादव ने कहा कि एकबार फिर जनता की आवाज को सत्ता के गलियारा तक पहुंचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस बर्बादी के तटबंध का कांग्रेस नेता हरीकिशोर सिंह और कर्पूरी जी ने विरोध किया था। जरूरत पड़ेगी तो संपूर्ण बागमती प्रक्षेत्र में पदयात्राएं संगठित होंगी। इस मौके पर बोलते हुए पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने कहा कि आपने नदी बचाने का उल्लेखनीय आंदोलन बिहार को दिया है। इसलिए आप आंदोलनकारियों को सलाम। आपके आंदोलन के साथ हूँ। बर्बादी तबाही की योजना को नहीं चलने दिया जायेगा।
आज अनशन के दूसरे दिन जिला अधिकारी द्वारा प्रति नियुक्त डीसीएलआर पूर्वी अनशनकारियों से वार्ता करने पहुंचे लेकिन अनशनकारियों ने रिव्यू कमेटी के द्वारा परियोजना को रिव्यू करने की बात पर अरे रहे और उन्होंने कहा कि परियोजना के जब तक रिव्यू करने की प्रशासन गारंटी नहीं देता है तब तक अनशन जारी रहेगा।
आज की सभा के अध्यक्ष था ठाकुर देवेंद्र कुमार एवं संचालन जितेंद्र यादव ने किया।
वक्त राज किशोर राय ,राम इकबाल राय ,राजा हुसैन, मुजाहिद हुसैन ,मिथिलेश राय ,जगन्नाथ पासवान ,राहुल कुमार यादव , उपेंद्र प्रसाद सिंह, हुकुमदेव राय, मुकेश शर्मा ,चंद्रशेखर राय ,प्रमोद कुमार सिंह ,राजेंद्र राय, सुनील राय बैजनाथ यादव, धीरेंद्र झा,रंजीत सिंह ,मनोज मंजिल ।

कटिहार में सभी परीक्षा केंद्रों पर शांति पूर्ण तथा कदाचार मुक्त परीक्षा हुआ संचालित, डीएम आशुतोष द्विवेदी एवं एसपी शिखर चौधरी सहित कई पदाधिकारी ने विभिन्न परीक्षा केंद्र का जायजा लिया।

कटिहार में सभी परीक्षा केंद्रों पर शांति पूर्ण तथा कदाचार मुक्त परीक्षा हुआ संचालित, डीएम आशुतोष द्विवेदी एवं एसपी शिखर चौधरी सहित कई पदाधिकारी ने विभिन्न परीक्षा केंद्र का जायजा लिया। 
-मनिहारी के सात केंद्रों पर कदाचार मुक्त मैट्रिक परीक्षा प्रारंभ 
-सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे से हो रहा था निगरानी 
प्रवीण कुमार, मौर्य ध्वज एक्सप्रेस।
कटिहार।
 जिले के नगर एवं प्रखंड क्षेत्र में प्रशासन ने परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए पुख्ता इंतजाम किया गया हैं। शांति पूर्ण वातावरण में सौहार्दपूर्ण मैट्रिक परीक्षा पहले दिन संचालित किया गया। डीएम आशुतोष द्विवेदी एवं एसपी शिखर चौधरी सहित कई पदाधिकारी ने विभिन्न परीक्षा केंद्र का जायजा लिया। कटिहार जिले के शहरी क्षेत्र के अलावा मनिहारी एवं बारसोई अनुमंडल मुख्यालय में परीक्षा केंद्रों पर शांति पूर्ण वातावरण में पहले दिन परीक्षा संचालित किया गया। सभी छात्र-छात्राओं ने परीक्षा केंद्र पर समय से पूर्व पहुंच गये।
जिले के मनिहारी में मैट्रिक परीक्षा कदाचार मुक्त और शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हो गई। कुल सात परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। प्रवेश द्वार पर परीक्षार्थियों की सघन जांच की जा रही है। किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए जूते तक खुलवाकर चेकिंग की जा रही है।
मनिहारी के प्रखंड विकास पदाधिकारी सनत कुमार ने बताया कि कदाचार मुक्त परीक्षा के संकल्प के साथ सभी केंद्रों पर चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। केंद्रों के 200 मीटर की परिधि में बीएनएस की धारा 163 लागू कर विधि-व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। पहली पाली के लिए सुबह 9 बजे तक और दूसरी पाली के लिए दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
पीएनएलएस कन्या उच्चतर विद्यालय, बीपीएसपी हाई स्कूल, बेतेल मिशन स्कूल सहित अन्य केंद्रों पर प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। उधर बारसोई में भी सभी परीक्षा केंद्रों पर शांति पूर्ण वातावरण में परीक्षा संचालित हुआ।

मुजफ्फरपुर, राजस्व महाअभियान एवं फार्मर रजिस्ट्री की सख्त समीक्षा: पांच अंचलाधिकारियों से शो-कॉज, 22 किसान सलाहकार व 22 कृषि समन्वयकों का वेतन बंद, 106 किसान सलाहकार एवं कृषि समन्वयक से स्पष्टीकरण l

राजस्व महाअभियान एवं फार्मर रजिस्ट्री की सख्त समीक्षा: पांच अंचलाधिकारियों से शो-कॉज, 22 किसान सलाहकार व 22 कृषि समन्वयकों का वेतन बंद, 106 किसान सलाहकार एवं कृषि समन्वयक से स्पष्टीकरण l
राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से चलाए गये राजस्व महाअभियान की प्रगति की जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने विस्तृत समीक्षा की। समाहरणालय में आयोजित बैठक में अंचलवार कार्यों की गहन जांच की गई, जिसमें पांच अंचलों का प्रदर्शन अत्यंत असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित अंचलाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में राजस्व महाअभियान के अंतर्गत कुल 1,22,939 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 73.67 प्रतिशत मामलों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल इंट्री ही अभियान की सफलता की कुंजी है, क्योंकि इससे पारदर्शिता बढ़ती है, निगरानी आसान होती है और आम जनता को समयबद्ध सेवा सुनिश्चित की जा सकती है।
हालांकि समीक्षा में पाया गया कि कांटी, कुढ़नी, सरैया, कटरा और मुसहरी अंचल में ऑनलाइन इंट्री का प्रतिशत अत्यंत कम है। आंकड़ों के अनुसार कांटी में मात्र 30 प्रतिशत, कुढ़नी में 49 प्रतिशत, सरैया में 56 प्रतिशत, कटरा में 60 प्रतिशत तथा मुसहरी में 64 प्रतिशत ही आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए गए हैं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने इन पांचों अंचलों के अंचलाधिकारियों से कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों में शिथिलता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
जिलाधिकारी ने बैठक में राजस्व महाअभियान के मूल लक्ष्य को रेखांकित करते हुए कहा कि आम जनता को सरल, पारदर्शी एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से सशक्त बनाया जाए, ताकि राजस्व वसूली में तेजी आए और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
उन्होंने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि—
-लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किया जाए।
-ऑनलाइन आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
-त्रुटिपूर्ण मामलों में शीघ्र सुधार कर समयबद्ध समाधान दिया जाए।
-राजस्व वसूली में अपेक्षित प्रगति लाई जाए।
-सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वे स्वयं लगातार साप्ताहिक समीक्षा एवं मॉनिटरिंग कर रहे हैं और कमजोर प्रदर्शन करने वाले अंचलों को विशेष ध्यान में रखा जा रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कार्य में लापरवाही या उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


दूसरी ओर बैठक में फार्मर रजिस्ट्री की भी गहन समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि किसान पंजीकरण की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने 22 किसान सलाहकार और 22 कृषि समन्वयकों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं 106 किसान सलाहकार एवं कृषि समन्वयकों से भी केवल स्पष्टीकरण पूछा गया है। बैठक में पाया गया कि जिले में आज 1,469 किसानों का निबंधन किया गया है तथा 2,306 किसानों का ई-केवाईसी संपन्न हुआ है। अब तक कुल 2,61,153 किसानों का निबंधन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि फार्मर रजिस्ट्री का कार्य मिशन मोड में किया जाए। प्रत्येक किसान तक पहुंच बनाकर सक्रियता एवं तत्परता से निबंधन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को ई-केवाईसी और पंजीकरण के लाभों से अवगत कराया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व महाअभियान और फार्मर रजिस्ट्री दोनों ही राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाएं हैं, जिनका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना और आम जनता एवं किसानों को सीधे लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों, राजस्व कर्मियों, किसान सलाहकारों और कृषि समन्वयकों को स्पष्ट कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता के साथ कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को शीघ्र पूरा किया जाए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने दोहराया कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता की जमीन से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान, राजस्व संग्रह में वृद्धि और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है। इसके लिए नियमित समीक्षा, कड़ी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

मुजफ्फरपुर, लीची अनुसंधान केंद्र, मुसहरी में प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव 2026 का भव्य आगाज, आधुनिक तकनीक से रूबरू हुए किसान l

लीची अनुसंधान केंद्र, मुसहरी में प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव 2026 का भव्य आगाज, आधुनिक तकनीक से रूबरू हुए किसान l 
प्रमंडलीय आयुक्त ने किया उद्घाटन, वैज्ञानिक खेती और नवाचार पर विशेष जोर l
बागवानी महोत्सव बना किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र, किसानों में भारी उत्साह l
प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव 2026 का भव्य एवं आकर्षक आयोजन लीची अनुसंधान केंद्र, मुसहरी में किया गया। तीन दिवसीय इस महोत्सव का शुभारंभ मंगलवार को तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त श्री गिरिवर दयाल सिंह ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के साथ ही परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया और बड़ी संख्या में किसान, गार्डनर एवं पुष्प प्रेमी कार्यक्रम में शामिल हुए।
उद्घाटन के उपरांत प्रमंडलीय आयुक्त ने कृषि विभाग द्वारा लगाए गए 10 स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली तथा उपस्थित किसानों से संवाद कर फीडबैक प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से अपील की कि वे महोत्सव में उपलब्ध तकनीकी जानकारी और योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें।
महोत्सव में सामान्य रूप से उत्पादित फल, फूल एवं सब्जियों के साथ-साथ पॉली हाउस में उत्पादित शिमला मिर्च, मशरूम, शहद, पान के पत्ते तथा जाड़े के मौसमी फूलों के पौधों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। आधुनिक तकनीक से तैयार इन उत्पादों ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। पॉली हाउस में उगाई गई सब्जियों की गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग को देखकर किसान उत्साहित नजर आए।

इस बार महोत्सव में कुल 15 वर्गों की विभिन्न 46 शाखाओं में प्रदर्शन के लिए पंजीकरण आमंत्रित किए गए थे। पंजीकरण के आधार पर प्रमंडल के विभिन्न जिलों से कृषकों, गार्डनरों एवं पुष्प प्रेमियों द्वारा कुल 46 प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। सामान्य रूप से उत्पादित सब्जी वर्ग में सर्वाधिक पंजीकरण प्राप्त हुआ है, जिससे स्पष्ट है कि किसान सब्जी उत्पादन की उन्नत विधियों में विशेष रुचि ले रहे हैं।

महोत्सव में प्रदर्शित विभिन्न वर्गों एवं शाखाओं का मूल्यांकन वैज्ञानिकों की कमेटी द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक वर्ग की प्रत्येक शाखा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। विजेताओं को प्रमाण पत्र के साथ प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमशः ₹3000, ₹2000 एवं ₹1500 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। आयोजकों का मानना है कि इससे प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन होगा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान फल, फूल, सब्जी, पान, मखाना एवं शहद जैसी फसलों की वैज्ञानिक खेती से संबंधित विस्तृत जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञ किसानों को उन्नत बीज, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, ड्रिप सिंचाई, पॉली हाउस तकनीक और मूल्य संवर्धन के उपायों के बारे में मार्गदर्शन दे रहे हैं। साथ ही नई-नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने एवं लागत घटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

तीन दिवसीय इस बागवानी महोत्सव का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा उत्पादों के बेहतर विपणन की संभावनाओं से अवगत कराना है। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। आयोजन समिति को उम्मीद है कि यह महोत्सव प्रमंडल में उद्यानिकी के विकास को नई दिशा देगा और किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना: कौशल, प्रशिक्षण और स्टाइपेंड के साथ युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान lअब अनुभव के साथ रोजगार की तैयारी: 18–28 वर्ष के युवाओं को उद्योग आधारित इंटर्नशिप से लेकर आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर l

मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना: कौशल, प्रशिक्षण और स्टाइपेंड के साथ युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान l
अब अनुभव के साथ रोजगार की तैयारी: 18–28 वर्ष के युवाओं को उद्योग आधारित इंटर्नशिप से लेकर आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर l
डीएम ने बैठक कर जनहित में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने पर दिया जोर l

 युवाओं को उद्योग आधारित आधुनिक कौशल, नई तकनीक और डिजिटल ज्ञान से सशक्त बनाने तथा उन्हें रोजगार का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना आज युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला बनती जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को व्यावहारिक अनुभव, बहु-क्षेत्रीय कौशल विकास तथा रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे बदलते औद्योगिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
इस योजना का संचालन बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत युवाओं को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें न केवल उन्नत तकनीकी दक्षता प्राप्त हो, बल्कि बेहतर रोजगार क्षमता, नेतृत्व विकास, सशक्त नेटवर्किंग और कैरियर संवर्धन के अवसर भी मिलें।

योजना का उद्देश्य
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मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना, उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यशैली से परिचित कराना तथा आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं मानी जाती; व्यावहारिक अनुभव और तकनीकी दक्षता भी उतनी ही आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह योजना युवाओं को प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहयोग भी प्रदान करती है, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
यह योजना राज्य के उन युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो 12वीं पास, आईटीआई, डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्रीधारी हैं। उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे अपनी योग्यता के अनुरूप इंटर्नशिप प्राप्त कर वास्तविक कार्य अनुभव हासिल करें।

लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता राशि
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योजना के तहत युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मासिक स्टाइपेंड प्रदान किया जाता है—

√ 12वीं उत्तीर्ण युवाओं को ₹4000 प्रतिमाह
√ आईटीआई/डिप्लोमा धारकों को ₹5000 प्रतिमाह
√ स्नातक एवं स्नातकोत्तर युवाओं को ₹6000 प्रतिमाह
√ इसके अतिरिक्त यदि कोई युवा अपने गृह जिले से बाहर, लेकिन बिहार राज्य के भीतर इंटर्नशिप करता है, तो उसे पहले तीन महीनों के लिए ₹2000 प्रतिमाह अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी। 
√ वहीं यदि कोई लाभार्थी बिहार राज्य से बाहर इंटर्नशिप करता है, तो उसे पूरी इंटर्नशिप अवधि के लिए ₹5000 प्रतिमाह अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

 आर्थिक सहयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभाशाली युवा स्थान या संसाधनों की कमी के कारण अवसरों से वंचित न रहें।

इंटर्नशिप की अवधि
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योजना के अंतर्गत इंटर्नशिप की अवधि न्यूनतम तीन माह से लेकर अधिकतम 12 माह तक निर्धारित की गई है। इस दौरान युवाओं को उद्योगों में प्रत्यक्ष कार्य अनुभव मिलेगा, जिससे वे कार्य संस्कृति, समय प्रबंधन, टीम वर्क और तकनीकी दक्षता जैसे महत्वपूर्ण गुणों को विकसित कर सकेंगे।

आवेदन की प्रक्रिया
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मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इच्छुक अभ्यर्थी पोर्टल https://cmpratigya.bihar.gov.in पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।
आवेदन हेतु अभ्यर्थियों को अपने आधार आधारित नाम और जन्मतिथि के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद उन्हें अपनी व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक जानकारी दर्ज करनी होगी। पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न इंटर्नशिप अवसरों को देखकर अभ्यर्थी अपनी योग्यता और रुचि के अनुरूप अवसर का चयन कर सकते हैं।
युवाओं की सुविधा के लिए 1800 296 5656 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, जहां योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है। इस स्कीम का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक 5000 प्रशिक्षु तथा आगामी 5 वर्षों में एक लाख प्रशिक्षु तैयार करना है।
जिलाधिकारी ने की अपील 
जिलाधिकारी ने इस योजना को युवाओं के लिए उन्नत कौशल और बेहतर रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भी बनाएगी।
योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर विशेष बल दिया, ताकि अधिक से अधिक युवा इस योजना का लाभ उठा सकें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि युवाओं तक योजना की सही और विस्तृत जानकारी पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे समय पर आवेदन कर अपने कैरियर को नई दिशा दे सकें।
युवाओं के सपनों को पंख 
मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना राज्य के युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार खोल रही है। यह योजना उन्हें केवल प्रशिक्षण ही नहीं देती, बल्कि उनके सपनों को साकार करने का मंच भी प्रदान करती है। उद्योग आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता और आर्थिक सहयोग के माध्यम से यह पहल बिहार के युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है।
निस्संदेह, यह योजना युवाओं को कुशल, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है, जो राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।