इसी क्रम में, अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठियों के माध्यम से बच्चों में नियमित विद्यालय उपस्थिति, गृहकार्य की निरंतरता, शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ स्वच्छता एवं अनुशासित आदतों को प्रोत्साहित करने हेतु ‘स्टुडेंट ऑफ द मंथ‘ पुरस्कार प्रदान किए गए। इस प्रयास से छात्रों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता हुआ स्पष्ट रूप से देखा गया।
वर्तमान समय में छात्रों में मोबाईल फोन एवं सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर माननीय शिक्षा मंत्री की संवेदनशील चिंता भी इस पी0टी0एम0 का एक महत्वपूर्ण केंद्र रही। मंत्री जी के निर्देशानुसार जनवरी 2026 की अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में शिक्षकों द्वारा बच्चों एवं अभिभावकों के साथ सोशल मीडिया के संभावित लाभों एवं गंभीर दुष्प्रभावों पर सार्थक संवाद किया गया। इस चर्चा के माध्यम से बच्चों को संतुलित, विविकपूर्ण और सीमित उपयोग के प्रति जागरूक किया गया, साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर सकारात्मक मार्गदर्शन देने के लिए प्रेरित किया गया।माननीय शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में की गई ये पहलें यह स्पष्ट करती हैं कि बिहार सरकार न केवल शैक्षणिक उपलब्धियों पर, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मूल्यबोध और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के प्रति भी पूर्णतः प्रतिबद्ध है। विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों द्वारा सोशल मीडिया एवं मोबाईल के अत्यधिक उपयोग से संबंधित नाटक, रोल प्ले, कहानी आदि का मंचन किया गया। निदेशक, प्राथमिक शिक्षा श्री विक्रम विरकर ने बताया कि मई 2025 से लगातार प्रत्येक काह के आखिरी शनिवार को बिहार के प्रारम्भिक विद्यालयों में वार्षिक पी0टी0एम0 कैलेंडर के अनुसार अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठि का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक संगोष्ठि का एक विशेष थीम निर्धारित है, इसी थीम को केंद्र में रखकर संगोष्ठि आयोजित की जाती है। यह पहल निश्चित रूप से बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।